Ganesh Chaturthi Pooja- गणपति की स्थापना से पहले इन 5 बातों को जरूर जान लें

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Ganesh Pooja- हिन्दू धर्म में किसी भी पूजा को चालू करने से पहले गणेश भगवान (Lord Ganesh) की पूजा की जाती है और अगर बात करे गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) की तो ये तो भगवान गणेश जी का ही त्यौहार है। इस पोस्ट में हम जानेंगे की गणेश चतुर्थी की पूजा (Ganesh Chaturthi Pooja) में गणेश जी की स्थापना से पूर्व हमे किन बातो का ध्यान रखना चाहिए।

गणेश चतुर्थी- Ganesh Chaturthi

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के दिन भगवान गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करके ही उनकी पूजा को प्रारम्भ किया जाता है। 9 दिन तक चलने वाली यह पूजा हिंदुस्तान सहित विदेशो में भी की जाने लगी है। 9 दिन के बाद ठीक दसवें दिन पुरे विधि विधान के साथ गणेश जी की प्रतिमा विसर्जित की जाती है।

पहले गणेश चतुर्थी की पूजा सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में प्रचलित थी लेकिन अब तो भारत के लगभग सभी हिस्सों में इस पूजा को लोग पुरे हर्षोउल्लास के साथ करते है। 

गणेश जी की स्थापना से पूर्व याद रखने योग्य बातें- Ganesh Chaturthi Pooja things to remember before Ganesh Murti Sthapana

एक तरफ जहां गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) पर बप्पा को घरों में विराजमान किया जाता है वहीं अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है। इन 10 दिनों में बप्पा की सुबह शाम पूजा (Ganesh Chaturthi Pooja) की जाती है।

लेकिन क्या आपको पता है की गणेश मूर्ति की स्थापना (Ganesh Murti Sthapana) से पूर्व किन बातो का ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए जानते है-

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👉 गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) पर गणेश भक्तों को चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए नहीं तो वह परेशान हो सकते हैं। भाद्र पद शुक्ल चतुर्थी की रात को चन्द्रमा देखने वाला कलंक का भागी होता है।

👉 नियत दिन पर आप गणपति को अपने घर में विराजमान करें। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बाईं ओर सूंढ वाली गणेशजी की प्रतिमा अधिक शुभ होती है। बाईं ओर सूंढ वाली गणेश जी की प्रतिमा को विरजमान करने से पहले कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चार हल्दी की बिंदी लगाएं।

👉 भगवान गणेश की पीठ के दर्शन कभी नहीं करने चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पीठ पर दरिद्रता का वास है, जो भी पीठ के दर्शन करता है तो दरिद्रता का प्रभाव बढ़ जाता है। 

👉 अगर आप गणेश जी को स्थापित कर रहे हैं तो उनके साथ गणेशजी की पत्नी रिद्धि और सिद्धि एवं पुत्र शुभ और लाभ की भी पूजा करनी चाहिए। यही नहीं मूषक भी पूजा करनी चाहिए।

👉 एक मानयता के अनुसार, गणेश जी को भूल से भी तुलसी नहीं अर्पित करनी चाहिए। पुराणों में गणेशजी के भोग में तुलसी का प्रयोग वर्जित बताया गया है। उन्हें दुर्वा अर्पित करनी चाहिए।

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