Nirjala Ekadashi and Ganga Dusshera- जाने क्यों मनाये जाते है ये दोनों त्यौहार

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Why Nirjala Ekadashi and Ganga Dusshera celebrated

Nirjala Ekadashi and Ganga Dusshera- हिन्दू मान्यता में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी दोनों का ही महत्त्व है, दोनों त्यौहार ज्येष्ठ के महीने में लगातार मनाये जाते है। ज्येष्ठ का महीना हिन्दू कैलेंडर का तीसरा महीना होता है जिसमे 1 जून को गंगा दशहरा और अगले दिन यानि 2 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जायेगा।

यह समय भारत में गर्मी का होता है जिस वजह से जल का महत्व बढ़ जाता है और इन दिनों में जल को बचाने व दान करने का महत्त्व बढ़ जाता है। इसी कारण से हमारे ऋषि मुनियों ने जल को बचाने के लिए इन त्योहारों को लगातार रखा। 

अब आपको बताते है दोनों त्योहारों का महत्त्व (Significance of Ganga Dusshera and Nirjala Ekadashi) 

गंगा दशहरा- 1 जून 2020 (Ganga Dusshera)

इस त्यौहार से हमे ये सन्देश मिलता है की हम जल की अहमियत को अपने जीवन में समझना चाहिए और साथ ही साथ पूजनीय गंगा नदी की भी पूजा करनी चाहिए। हिन्दू मान्यता में गंगा नदी को अन्य नदियों से ज्यादा महत्व दिया जाता है और पूजनीय भी माना जाता है। अगर हम भौगोलिक द्रष्टि से देखें तो सिंधु और ब्रहमपुत्र नदी गंगा नदी से बड़ी है और वैज्ञानिक द्रष्टि की बात करे तो वैज्ञानिक भी कहते है की गंगा नदी का जल गुणो से भरपूर है और इसका धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। 

निर्जला एकादशी- 1 जून 2020 (Nirjala Ekadashi)

अभी हमने आपको गंगा दशहरा के बारे में बताया और हम आपको बता रहे है निर्जला एकादशी के बारे में। गंगा दशहरे से अगले दिन निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है और इस व्रत में पुरे दिन जल नहीं पिया जाता है। एक कथा के अनुसार महाभारत काल में सबसे पहले भीम ने इस व्रत को किया था। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस व्रत में जल दान का भी संकल्प लिया जाता है। इस व्रत में हर एकादशी व्रत की तरह भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है।

इन दोनों त्योहारों को अगर हम देखे तो हमे यही पता चलता है की दोनों त्योहारों में पानी को बचाने का संकल्प लिया जाता है। 


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